नैन और बैन मा बैर बडो

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नैन और बैन मा बैर बड़ो

लै अंजुरी मा अबीर चली
अलबेली छबीली अजब ब्रजनारी
मोतियन मांग संवार लई
अखियॉं मदमावें ज्यों भंग की प्याली
कंचुकि बांध लई उरमा
सरमाय रही छावै मुख पर लाली
झांझर की झनकार लगें
मानौ नृत्य करे पिय के संग आली
राह मिले बनवारी अनारी
तो बाने पकड लई अंग की सारी
छोडो लला न करो बरजोरी
है लागत लाज करो ना ठिठोली
रंग अबीर का पोत दिया सब
लागे कहन गोरी आज है होरी
नैन और बैन में बैर बड़ो
एक दूजे पै चोट करे हैं करारी
नैन कहें पिय भावत हैं
और बैन कहें है बडे ही अनारी
लै अंजुरी मां अबीर चली
प्रेमा शुक्ल, अकोला
9922516096

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